नशामुक्त भारत अभियान और गुरुदेव सियाग: मीडिया रिपोर्टों, सिद्ध योग और आध्यात्मिक पहल

guru siyag nasha mukti bharat
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नशामुक्त भारत की दिशा में 9 सितंबर 2026 को सामने आया एक महत्वपूर्ण सरकारी कदम आध्यात्मिक संगठनों की भूमिका को नए तरीके से सामने लाता है। सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग ने अध्यात्म विज्ञान सत्संग केंद्र, चिन्मय मिशन, दिव्य ज्योति जागृति संस्थान और हरे कृष्णा आंदोलन के साथ समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए। इस पहल का उद्देश्य केवल नशे के खिलाफ संदेश देना नहीं, बल्कि जागरूकता, रोकथाम, नशे की लत से उबरने, सामाजिक सहयोग और पुनर्वास के संदेश को जमीनी स्तर तक पहुंचाना बताया गया है। PIB की 9 सितंबर 2026 की विज्ञप्ति के अनुसार, इन साझेदारियों के जरिए आध्यात्मिक संगठनों के व्यापक समुदाय नेटवर्क का उपयोग नशे के खिलाफ सामाजिक लामबंदी के लिए किया जा रहा है।

यहां गुरुदेव रामलाल जी सियाग और उनसे जुड़े अध्यात्म विज्ञान सत्संग केंद्र का नाम इसलिए महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि 2026 की इस सरकारी पहल में केंद्र को आधिकारिक साझेदार आध्यात्मिक संगठनों में शामिल किया गया है। सरकार के अनुसार, पहले से जुड़े आध्यात्मिक संगठनों के साथ मिलकर नशामुक्त भारत अभियान की पहलों ने 34.42 करोड़ से अधिक लोगों तक पहुंच बनाई है। मंत्रालय ने यह भी कहा कि योग, ध्यान, आध्यात्मिक परामर्श और मूल्य-आधारित दृष्टिकोण को नशामुक्ति से जुड़ी पहलों में शामिल किया गया है।

1. नशामुक्त भारत में अध्यात्म विज्ञान सत्संग केंद्र की नई भूमिका

Table of Contents

9 सितंबर 2026 की PIB विज्ञप्ति का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा यह है कि अध्यात्म विज्ञान सत्संग केंद्र अब नशामुक्त भारत अभियान के लिए सामाजिक और आध्यात्मिक नेटवर्क के रूप में औपचारिक साझेदारी में आया है। मंत्रालय के अनुसार, समझौते का उद्देश्य मादक पदार्थों के सेवन के खिलाफ जागरूकता, रोकथाम, पुनर्प्राप्ति और सामाजिक एकजुटता को मजबूत करना है। इस अवसर पर मंत्रालय के सचिव सुधांश पंत, नशीले पदार्थों की रोकथाम से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी और चारों आध्यात्मिक संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद थे। अध्यात्म विज्ञान सत्संग केंद्र की ओर से श्री चंद्र सिंह ने समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया।

इस घटनाक्रम को केवल एक औपचारिक सरकारी कार्यक्रम समझना अधूरा होगा। नशे की समस्या केवल व्यक्ति की आदत नहीं रहती; उसका असर परिवार, आर्थिक स्थिति, सामाजिक संबंधों और समुदाय पर भी पड़ सकता है। इसलिए मंत्रालय ने आध्यात्मिक संगठनों की जमीनी पहुंच को उपयोगी माना है। सरकारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि इन संस्थाओं की व्यापक मौजूदगी प्रभावित व्यक्तियों और परिवारों में resilience बढ़ाने, नशे से जुड़े stigma को कम करने और जरूरतमंद लोगों को समय पर सहायता, उपचार और पुनर्वास की ओर प्रोत्साहित करने में भूमिका निभा सकती है।

2. 9 सितंबर 2026 का PIB अपडेट और चार नए आध्यात्मिक संगठन

8 सितंबर 2026 को PIB ने इस साझेदारी के अगले चरण की जानकारी देते हुए बताया था कि अगले दिन चार आध्यात्मिक संगठनों के साथ समझौता ज्ञापन किए जाने वाले हैं। इस सूची में अध्यात्म विज्ञान सत्संग केंद्र, चिन्मय मिशन, दिव्य ज्योति जागृति संस्थान और हरे कृष्णा मूवमेंट शामिल थे। PIB ने उस समय यह भी बताया कि पहले आर्ट ऑफ लिविंग, ब्रह्मा कुमारी, संत निरंकारी मिशन, इस्कॉन, श्री राम चंद्र मिशन, ऑल वर्ल्ड गायत्री परिवार, शिवानंद योग वेदांत धनवंतरी आश्रम और पतंजलि विश्वविद्यालय जैसे संगठनों के साथ समझौते किए जा चुके थे।

यानी 2026 का कदम किसी एक संस्था तक सीमित नहीं है। सरकारी दृष्टिकोण यह है कि नशामुक्ति को केवल प्रशासनिक कार्रवाई के रूप में नहीं, बल्कि whole-of-society approach यानी पूरे समाज की भागीदारी के रूप में देखा जाए। इस मॉडल में सरकार, नागरिक समाज, स्वयंसेवक, परिवार और आध्यात्मिक संस्थाएं अलग-अलग स्तर पर भूमिका निभाती हैं। PIB के अनुसार, पहले की साझेदारियों ने जन-जागरूकता, स्वयंसेवक जुटाने तथा योग, ध्यान और आध्यात्मिक परामर्श को नशामुक्ति प्रयासों में शामिल करने में सहायता की है।

3. 34.42 करोड़ लोगों तक पहुंच और जमीनी स्तर की पहल

9 सितंबर की आधिकारिक विज्ञप्ति में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के सचिव सुधांश पंत ने बताया कि मंत्रालय से जुड़े संगठनों की सामूहिक पहल के तहत 34.42 करोड़ से अधिक नागरिकों तक पहुंच बनाई जा चुकी है। इसी के साथ नए साझेदार संगठनों से अपने व्यापक नेटवर्क के माध्यम से नशे के सेवन की रोकथाम, जागरूकता और recovery का संदेश जमीनी स्तर तक ले जाने का आग्रह किया गया।

4. गुरुदेव रामलाल जी सियाग कौन थे?

गुरुदेव रामलाल जी सियाग को उपलब्ध स्रोतों में राजस्थान के एक आध्यात्मिक गुरु और सिद्ध योग परंपरा से जुड़े सिद्धगुरु के रूप में वर्णित किया गया है। उनके द्वारा प्रचारित Guru Siyag’s Siddha Yoga (GSSY) मंत्र-जप और ध्यान पर आधारित साधना है तथा नाथ परंपरा से जुड़ी सिद्ध साधना है। इस पद्धति में ध्यान, मंत्र और कुंडलिनी जागरण से जुड़े अनुभवों को महत्वपूर्ण माना जाता है।

Times of India की 14 मार्च 2011 की रिपोर्ट ने उन्हें जोधपुर के आश्रम से जुड़े ऐसे गुरु के रूप में प्रस्तुत किया था जो साधकों तक पहुंचने के लिए अलग-अलग स्थानों पर शाक्तिपात दीक्षा कार्यक्रम आयोजित करते थे। रिपोर्ट में बताया गया कि वे मैदानों, अस्पतालों और जेलों तक में दीक्षा कार्यक्रम आयोजित करते थे और आश्रम इन कार्यक्रमों का खर्च उठाता था। उसी रिपोर्ट में यह भी उल्लेख था कि वे नियमित रूप से राजस्थान और गुजरात के विभिन्न क्षेत्रों में जाते थे।

गुरुदेव सियाग की जीवन-कथा में आध्यात्मिक खोज को एक केंद्रीय स्थान मिलता है। Times of India की रिपोर्ट के अनुसार, वे राजस्थान के पालाना गांव में जन्मे थे और बाद में भारतीय रेलवे में क्लर्क के रूप में काम किया। रिपोर्ट में उनके आध्यात्मिक जीवन में 1968 के बाद आए बदलाव और बाबा गंगाईनाथजी योगी से उनके संबंध का भी उल्लेख मिलता है।

5. सिद्ध योग, मंत्र और ध्यान की मूल अवधारणा

गुरुदेव सियाग की सिद्ध योग पद्धति में मंत्र-जप और ध्यान केंद्रीय अभ्यास हैं। वेबसाइट के मुताबिक साधक को मंत्र दिया जाता है और ध्यान के दौरान गुरुदेव की तस्वीर पर ध्यान केंद्रित करने की पद्धति बताई जाती है। ध्यान के दौरान कुछ साधकों में स्वतः होने वाली योगिक गतिविधियां अनुभव हो सकती हैं, जिन्हें जागृत कुंडलिनी से जोड़ा गया है।

Times of India की रिपोर्ट भी इसी प्रक्रिया का वर्णन करती है। उसमें बताया गया है कि साधक को एक मंत्र दिया जाता है, फिर गुरुदेव की तस्वीर को ध्यान का केंद्र बनाकर लगभग 15 मिनट ध्यान करने की बात कही गई थी। रिपोर्ट में सुबह और शाम ध्यान तथा मंत्र का मानसिक रूप से जाप करने का उल्लेख है।

6. नशे से मुक्ति के संदर्भ में सिद्ध योग का उल्लेख

सिद्ध साधना का उद्देश्य व्यक्ति को मानसिक परेशानियों शारीरिक और मानसिक समस्याओं, stress औरaddiction जैसी प्रवृत्तियों से बाहर निकालने में सहायता करना है।

2011 की Times of India रिपोर्ट में भी साधकों द्वारा विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं और addictions से छुटकारे के अनुभव बताए गए थे। रिपोर्ट में diabetes, blood pressure और addictions से राहत के साधकों के दावों का उल्लेख किया गया था, साथ ही कुछ लोगों द्वारा AIDS और cancer से ठीक होने के दावे भी रिपोर्ट किए गए थे।

नशामुक्ति के संदर्भ में इस पूरी चर्चा का अधिक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि आध्यात्मिक अनुशासन को सामाजिक समर्थन के साथ कैसे जोड़ा जा रहा है। 2026 की PIB विज्ञप्ति में सरकार ने स्वयं योग, ध्यान, आध्यात्मिक परामर्श और value-based approaches को नशामुक्ति प्रयासों में शामिल करने की बात कही है। इसलिए आज के संदर्भ में गुरुदेव सियाग और अध्यात्म विज्ञान सत्संग केंद्र का उल्लेख एक व्यापक सामाजिक अभियान के हिस्से के रूप में सामने आता है।

7. आध्यात्मिक संगठनों को सरकार के साथ जोड़ने का उद्देश्य

सरकार द्वारा आध्यात्मिक संस्थाओं के साथ साझेदारी का मूल तर्क उनकी community reach है। किसी व्यक्ति को नशे से बाहर आने के लिए केवल एक संदेश काफी नहीं होता; उसे परिवार, मित्रों, समुदाय और कभी-कभी पेशेवर उपचार व्यवस्था का सहयोग चाहिए। आध्यात्मिक संस्थाएं ऐसे समुदायों तक पहुंच सकती हैं जहां सरकारी संदेश हमेशा सीधे नहीं पहुंच पाता। PIB के अनुसार, इन्हीं नेटवर्कों का उपयोग prevention, awareness और recovery के संदेश को जमीनी स्तर पर पहुंचाने के लिए किया जाना है।

यहां एक और पहलू सामने आता है—कलंक कम करना। कई परिवार नशे की समस्या को बीमारी या सहायता की जरूरत के रूप में देखने के बजाय सामाजिक शर्म का विषय मान लेते हैं। मंत्रालय के अनुसार, आध्यात्मिक संगठनों की जमीनी उपस्थिति प्रभावित व्यक्तियों को सहायता, उपचार और पुनर्वास लेने के लिए प्रोत्साहित करने में मदद कर सकती है।

8. गुरुदेव सियाग का मीडिया में उल्लेख

गुरुदेव सियाग और उनकी सिद्ध योग पद्धति का उल्लेख केवल एक माध्यम में नहीं मिलता। Gurusiyag.org के ‘In Media’ पेज पर अंग्रेजी, गुजराती और हिंदी मीडिया सामग्री के समाचार-पत्र कटिंग और मीडिया क्लिप का संग्रह उपलब्ध है। वेबसाइट स्वयं इस पेज को गुरुदेव रामलाल जी सियाग, सिद्ध योग और ध्यान से संबंधित मीडिया कवरेज के संग्रह के रूप में प्रस्तुत करती है।

यह संग्रह इस बात को समझने के लिए उपयोगी है कि समय के अलग-अलग दौर में गुरुदेव सियाग की गतिविधियों और सिद्ध योग को मीडिया में किस प्रकार प्रस्तुत किया गया।

9. Gurusiyag.org के ‘In Media’ संग्रह में क्या मिलता है?

Gurusiyag.org का ‘In Media’ पेज विशेष रूप से उल्लेखनीय है क्योंकि वहां अंग्रेजी, गुजराती और हिंदी मीडिया सामग्री को अलग-अलग श्रेणियों में रखा गया है। पेज पर अनेक समाचार-पत्र कटिंग और मीडिया क्लिप उपलब्ध हैं तथा वेबसाइट इसे गुरुदेव सियाग, Siddha Yoga और Meditation से जुड़ी मीडिया सामग्री के रूप में प्रस्तुत करती है।

उसी पेज पर गुरुदेव सियाग का एक वक्तव्य भी प्रकाशित है जिसमें वे मानवता में sattva guna को बढ़ाने और tamasic tendencies को समाप्त करने की अपनी आध्यात्मिक दिशा की बात करते हैं। यह कथन उनके मिशन की भाषा और उद्देश्य को समझने में मदद करता है।

आज जब नशामुक्त भारत अभियान में अनुशासन, मूल्य-आधारित जीवन, सामुदायिक सहयोग और आध्यात्मिक भागीदारी की बात हो रही है, तब इस पुराने मीडिया-संदर्भ को 2026 की सरकारी पहल के साथ देखना दिलचस्प है। पहले जहां सिद्ध योग की चर्चा आध्यात्मिक साधना और व्यक्तिगत अनुभव के संदर्भ में होती थी, वहीं अब अध्यात्म विज्ञान सत्संग केंद्र की भागीदारी एक औपचारिक सामाजिक अभियान के संदर्भ में सामने आई है।

10. Times of India की 2011 की रिपोर्ट में गुरुदेव सियाग

14 मार्च 2011 को प्रकाशित Times of India की “Learning focus” रिपोर्ट में गुरुदेव सियाग को “Siddha Yogi from Jodhpur” के रूप में प्रस्तुत किया गया था। रिपोर्ट के अनुसार, वे साधकों को शाक्तिपात दीक्षा देने के लिए विभिन्न स्थानों पर कार्यक्रम आयोजित करते थे और आम लोगों तक आध्यात्मिक साधना पहुंचाने पर जोर देते थे। रिपोर्ट में मैदानों, अस्पतालों और जेलों में आयोजित कार्यक्रमों का भी उल्लेख मिलता है।

रिपोर्ट में उनके ध्यान की पद्धति का भी वर्णन किया गया है। इसमें गुरुदेव की तस्वीर पर ध्यान केंद्रित करने, मंत्र का मानसिक जाप करने और लगभग 15 मिनट ध्यान करने की बात कही गई थी। रिपोर्ट ने उनके अनुयायियों के अनुभवों को भी शामिल किया और कुछ स्वास्थ्य तथा addiction संबंधी दावों को साधकों के अनुभवों के रूप में प्रस्तुत किया।

यह रिपोर्ट इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दिखाती है कि 2026 की सरकारी साझेदारी से बहुत पहले गुरुदेव सियाग की साधना और उनके कार्यक्रमों का मीडिया में उल्लेख हो चुका था। यानी आज अध्यात्म विज्ञान सत्संग केंद्र का नशामुक्त भारत अभियान से जुड़ना एक बिल्कुल अलग-थलग घटना नहीं, बल्कि संस्था की पुरानी आध्यात्मिक गतिविधियों के व्यापक सामाजिक संदर्भ में देखने योग्य घटनाक्रम है।

11. शाक्तिपात दीक्षा, मंत्र और ध्यान का वर्णन

Times of India के अनुसार, गुरुदेव सियाग द्वारा दी जाने वाली साधना में मंत्र महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। रिपोर्ट में बताया गया था कि साधक को मंत्र दिया जाता है और उसके बाद गुरुदेव की तस्वीर को ध्यान का केंद्र बनाकर मंत्र का मानसिक जाप किया जाता है। इसी रिपोर्ट में कुंडलिनी और स्वतः होने वाली योगिक गतिविधियों के बारे में गुरुदेव के विचार भी प्रकाशित किए गए थे।

मीडिया में इस प्रक्रिया को कभी आध्यात्मिक अनुभव, कभी meditation technique और कभी kundalini practice के रूप में प्रस्तुत किया गया है। यही कारण है कि गुरुदेव सियाग की शिक्षाओं पर लिखते समय आध्यात्मिक परंपरा की भाषा और वैज्ञानिक प्रमाण की भाषा को अलग-अलग रखना आवश्यक है। अनुभव को अनुभव की तरह और प्रमाण को प्रमाण की तरह प्रस्तुत करना ही सबसे संतुलित तरीका है।

12. Twinkle Ghosh की रिपोर्ट और Siddha Yoga Philosophy

Twinkle Ghosh report on Siddha Yoga में गुरुदेव सियाग की सिद्ध योग संबंधी मीडिया सामग्री को संकलित किया गया है। इस सामग्री को गुरुदेव सियाग के सिद्ध योग दर्शन और उससे जुड़े मीडिया संदर्भों को समझने के लिए पढ़ा जा सकता है। इसमें सिद्ध योग को केवल आसन या शारीरिक exercise के रूप में देखने के बजाय मंत्र, ध्यान, गुरु-शिष्य संबंध और आंतरिक परिवर्तन से जुड़ी साधना के रूप में प्रस्तुत किया जाता है। यही वह बिंदु है जहां गुरुदेव सियाग की विचारधारा सामान्य fitness-oriented yoga से अलग दिखाई देती है। उनकी पद्धति में ध्यान और मंत्र को केंद्रीय स्थान मिलता है तथा कुंडलिनी जागरण को साधना के अनुभव से जोड़ा जाता है। मीडिया लेखों और संबंधित सामग्री में साधकों के व्यक्तिगत अनुभव भी सामने आते हैं।

13. मीडिया रिपोर्टों में साधकों के अनुभव

गुरुदेव सियाग से संबंधित मीडिया सामग्री में साधकों के अनुभव एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहे हैं। Times of India की रिपोर्ट में भी कई अनुयायियों द्वारा meditation और mantra practice से लाभ महसूस करने की बातें दर्ज की गई थीं। रिपोर्ट ने इन बातों को practitioners के claims के रूप में प्रस्तुत किया है। इसी तरह Gurusiyag.org पर भी disciples’ experiences और cases से जुड़े अलग-अलग sections उपलब्ध हैं। आधिकारिक वेबसाइट GSSY को stress, mental afflictions और addiction से मुक्ति से जोड़ती है।

14. नशामुक्ति और आध्यात्मिक अनुशासन का संबंध

नशामुक्ति केवल किसी पदार्थ को छोड़ देने का नाम नहीं है। कई मामलों में व्यक्ति को अपनी दिनचर्या, सामाजिक वातावरण, तनाव से निपटने के तरीके और जीवन के उद्देश्य पर भी काम करना पड़ता है। इसी कारण अनुशासन, ध्यान, सामाजिक समर्थन और मूल्य-आधारित जीवन जैसे विषय नशामुक्ति की व्यापक चर्चा में जगह बनाते हैं। PIB के अनुसार, मंत्रालय की आध्यात्मिक संगठनों के साथ साझेदारी में योग, meditation, spiritual counselling और value-based approaches को शामिल करने का अनुभव रहा है।

15. सरकार, समाज और आध्यात्मिक संस्थाओं की साझेदारी

8 सितंबर की PIB विज्ञप्ति ने साफ किया कि सरकार आध्यात्मिक संस्थाओं की भूमिका को समुदायों के मार्गदर्शन, अनुशासन और value-based living से जोड़ रही है। उसी विज्ञप्ति में बताया गया कि पहले से हुई साझेदारियों ने mass-awareness programmes और volunteer mobilisation को सहायता दी है।

9 सितंबर को यह साझेदारी वास्तविक समझौता ज्ञापनों में बदल गई। चार संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने मंत्रालय के साथ MoUs पर हस्ताक्षर किए और कार्यक्रम में anti-drug pledge भी कराया गया। मंत्रालय ने अपने कार्यक्रम में नशीले पदार्थों के दुष्परिणाम तथा rehabilitation से संबंधित तीन short films भी प्रदर्शित कीं।

यह मॉडल एक बड़ी बात बताता है—नशामुक्ति केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है। परिवार, स्कूल, समुदाय, सामाजिक संस्थाएं, स्वयंसेवक, चिकित्सा व्यवस्था और आध्यात्मिक संगठन अपने-अपने स्तर पर योगदान कर सकते हैं। जब इन सभी स्तरों को एक दिशा में जोड़ा जाता है तो awareness message केवल पोस्टर या सरकारी विज्ञापन नहीं रहता, बल्कि सामाजिक बातचीत का हिस्सा बन सकता है।

16. नशामुक्ति में जागरूकता, पुनर्वास और सामाजिक स्वीकार्यता

नशे की समस्या में एक व्यक्ति को केवल यह कहना कि “नशा छोड़ दो” पर्याप्त नहीं होता। समस्या अक्सर आदत, निर्भरता, मानसिक तनाव, सामाजिक परिस्थिति और पारिवारिक संबंधों से जुड़ी होती है। इसलिए सरकार ने अपने 2026 के वक्तव्य में prevention के साथ recovery, treatment और rehabilitation की दिशा में लोगों को प्रोत्साहित करने की बात की है।

मंत्रालय ने stigma को कम करने को भी महत्वपूर्ण माना है। जब परिवार किसी व्यक्ति को केवल दोषी मानता है, तो मदद लेने की संभावना कम हो सकती है। यदि समाज उसे सहायता की जरूरत वाले व्यक्ति के रूप में देखे और उपचार व पुनर्वास की दिशा में ले जाए, तो सहायता प्राप्त करने का रास्ता अधिक खुल सकता है।

इसी बिंदु पर आध्यात्मिक संगठनों की भूमिका उपयोगी हो सकती है। उनके पास पहले से बने समुदाय, स्वयंसेवक और नियमित कार्यक्रम होते हैं। यदि इन नेटवर्कों के माध्यम से नशे से बचाव और उपचार की जानकारी जिम्मेदारी से पहुंचाई जाए, तो लोगों तक संदेश पहुंचाने का दायरा बढ़ सकता है।

17. सिद्ध योग के बारे में दावों को कैसे समझें?

गुरुदेव सियाग की सिद्ध योग पद्धति के बारे में आधिकारिक वेबसाइट कई आध्यात्मिक और स्वास्थ्य-संबंधी लाभों का दावा करती है। मीडिया रिपोर्टों में भी साधकों के अनुभव और कुछ स्वास्थ्य संबंधी दावे दर्ज किए गए हैं।

विशेष रूप से cancer, AIDS, diabetes, blood pressure या substance-use disorder जैसी गंभीर स्थितियों के संदर्भ में ,Times of India ने 2011 में ऐसे दावों को practitioners के claims के रूप में रिपोर्ट किया था

18. गुरुदेव सियाग की विरासत और आज का संदर्भ

गुरुदेव सियाग की विरासत का एक हिस्सा उनके द्वारा प्रचारित Siddha Yoga है, जबकि दूसरा हिस्सा उनके संगठन और उससे जुड़े समुदायों की गतिविधियां हैं। Gurusiyag.org आज भी उनके सिद्ध योग, ध्यान, शाक्तिपात, कुंडलिनी और मीडिया सामग्री से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराता है।

2011 की Times of India रिपोर्ट दिखाती है कि उनके कार्यक्रम उस समय भी विभिन्न क्षेत्रों में आयोजित होते थे और मीडिया का ध्यान उनकी साधना तथा शाक्तिपात पद्धति पर था। अब 2026 में अध्यात्म विज्ञान सत्संग केंद्र का नशामुक्त भारत अभियान के साथ औपचारिक रूप से जुड़ना इस यात्रा में एक नया सार्वजनिक आयाम जोड़ता है।

इस पूरे घटनाक्रम को देखें तो एक दिलचस्प बदलाव दिखाई देता है। पहले चर्चा मुख्य रूप से गुरु, साधना, मंत्र, ध्यान और साधकों के अनुभव के इर्द-गिर्द थी। अब उसी संगठन का नाम सरकार के नशामुक्त भारत अभियान में एक साझेदार के रूप में सामने आया है, जहां लक्ष्य जागरूकता, रोकथाम, सामाजिक एकजुटता और recovery को मजबूत करना है।

19. निष्कर्ष: नशामुक्त भारत की दिशा में सामूहिक प्रयास

2026 की सरकारी घोषणाओं के आधार पर यह स्पष्ट है कि भारत में नशामुक्ति के प्रयासों में सरकार आध्यात्मिक और सामाजिक संगठनों की भूमिका को विस्तार दे रही है। अध्यात्म विज्ञान सत्संग केंद्र और गुरुदेव सियाग का नाम इसी नए चरण में महत्वपूर्ण रूप से सामने आता है। 9 सितंबर 2026 को चार आध्यात्मिक संगठनों के साथ MoUs पर हस्ताक्षर हुए और सरकार ने बताया कि पहले से जुड़े संगठनों के संयुक्त प्रयासों के माध्यम से 34.42 करोड़ से अधिक लोगों तक पहुंच बनाई गई है।

गुरुदेव सियाग की सिद्ध योग परंपरा में मंत्र, ध्यान, शाक्तिपात और कुंडलिनी जागरण को प्रमुख स्थान दिया जाता है। 2011 की Times of India रिपोर्ट ने उनकी गतिविधियों, ध्यान-पद्धति और साधकों के अनुभवों को सामने रखा था, जबकि Gurusiyag.org का ‘In Media’ संग्रह उनके बारे में उपलब्ध मीडिया सामग्री को एक जगह संकलित करता है।

20. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. 2026 में अध्यात्म विज्ञान सत्संग केंद्र किस सरकारी अभियान से जुड़ा है?
अध्यात्म विज्ञान सत्संग केंद्र सितंबर 2026 में **नशा मुक्त भारत अभियान (Nएवं अधिकारिता मंत्रालय के साथ साझेदारी में शामिल हुआ। 9 सितंबर 2026 को केंद्र सहित चार आध्यात्मिक संगठनों के साथ MoUs पर हस्ताक्षर किए गए।

2. नशामुक्त भारत अभियान में आध्यात्मिक संगठनों की भूमिका क्या है?
सरकार के अनुसार उनकी भूमिका जागरूकता, रोकथाम, सामाजिक लामबंदी, स्वयंसेवक जुटाने, recovery के संदेश को फैलाने तथा जरूरतमंद लोगोंस की दिशा में प्रोत्साहित करने से जुड़ी है। योग, ध्यान, आध्यात्मिक परामर्श और value-based approaches को भी इन साझेदारियों से जोड़ा गया है।

5. गुरुदेव सियाग के बारे में पुरानी मीडिया रिपोर्ट कहां मिलती है?
Gurusiyag.org पर In Media पेज में हिंदी, गुजराती और अंग्रेजी मीडिया सामग्रअतिरिक्त Times of India की 14 मार्च 2011 की “Learning focus” रिपोर्ट में गुरुदेव सियाग की साधना और कार्यक्रमों का विस्तृत उल्लेख मिलता है।

Sources:

https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2308479&reg=48&lang=2

https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2307957&reg=48&lang=2

https://timesofindia.indiatimes.com/learning-focus/articleshow/7700678.cms

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